गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय में आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान का संगम

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हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के मैकेनिकल अभियांत्रिकी विभाग के सभागार में “विकसित भारत के लिए डिजिटलीकरण की भूमिका” विषय पर एक प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को डिजिटल युग की आवश्यकताओं से अवगत कराना और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना था।

कार्यक्रम में एआईसीटीई के समन्वयक डॉ. बुद्ध चंद्र शेखर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। अपने उद्बोधन में उन्होंने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीकी विकास के बीच संबंध को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। डॉ. शेखर ने कहा कि भारत के विद्यार्थियों की मानसिक शक्ति हजारों वर्षों की सांस्कृतिक और वैचारिक परंपरा से विकसित हुई है, जो उन्हें वैश्विक स्तर पर विशिष्ट बनाती है।

उन्होंने बताया कि भारतीय वेदों पर आज भी विश्व के विभिन्न देशों में शोध कार्य हो रहे हैं और जर्मनी जैसे देशों में संस्कृत और वेदों के अध्ययन को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को अपने भीतर निहित क्षमताओं को पहचानने और निरंतर सीखने की प्रक्रिया अपनाने की प्रेरणा दी।

डॉ. शेखर ने “पहले सीखो, फिर कमाओ” के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में ज्ञान और कौशल ही सफलता की कुंजी हैं। उन्होंने अभियांत्रिकी के छात्रों को सुझाव दिया कि वे ऐसे सॉफ्टवेयर और तकनीकी समाधान विकसित करें, जो समाज के कल्याण में सहायक हों और आम जनता के जीवन को सरल बनाएं।

कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने अपने संबोधन में कहा कि डिजिटलीकरण आज के समय की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और उद्योग के क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन संभव है और विद्यार्थियों को नई तकनीकों को अपनाकर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

संकायाध्यक्ष प्रो. मयंक अग्रवाल ने तकनीकी शिक्षा के बदलते स्वरूप और इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी उभरती तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने तकनीकी शिक्षा को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष प्रो. विपुल शर्मा ने मुख्य वक्ता सहित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम में विभाग के अनेक शिक्षकगण उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. एम.एम. तिवारी, डॉ. संजीव लाम्बा, गजेंद्र सिंह, प्रवीण पांडेय, डॉ. अमन त्यागी, मयंक पोखरियाल, नमित खंडूजा तथा सहायक कुलसचिव डॉ. पंकज शामिल थे। अन्य शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। व्याख्यान कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रशांत कौशिक ने किया।

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