महादेव कुड़ियाल के प्रवचनों ने युवाओं को कराया आत्मबोध का अनुभव

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देहरादून। शहर की पंजाबी कॉलोनी उस समय एक विशिष्ट आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठी, जब निरंकारी मिशन के सान्निध्य में सदगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की कृपा से एक विशाल युवा सत्संग का आयोजन किया गया। वातावरण में भक्ति, चिंतन और आत्मबोध की ऐसी तरंगें प्रवाहित हो रही थीं, मानो प्रत्येक उपस्थित युवा अपने भीतर किसी नई दिशा की खोज कर रहा हो।

इस आध्यात्मिक संगम में महादेव कुड़ियाल ने अपने ओजस्वी और चिंतनशील प्रवचनों से युवाओं के अंतर्मन को स्पर्श किया। उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल राष्ट्र का भविष्य नहीं, बल्कि उसकी आत्मा का प्रतिबिंब भी है। यदि यह युवा वर्ग आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ता है, तो समाज में संतुलन, संवेदना और सत्य की स्थापना स्वतः संभव हो जाती है।

कुड़ियाल ने अत्यंत सूक्ष्मता से यह स्पष्ट किया कि आधुनिकता के इस तीव्र दौर में, जहां भौतिक उपलब्धियों की दौड़ ने मनुष्य को बाह्य सफलता तक सीमित कर दिया है, वहीं आध्यात्मिक ज्ञान उसे भीतर की शांति और वास्तविक संतुष्टि प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सत्संग केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण का वह माध्यम है, जो व्यक्ति को स्वयं से परिचित कराता है।

उन्होंने युवाओं को सचेत करते हुए कहा कि नशा, भ्रमित संगति और डिजिटल दुनिया का अतिरेक आज की पीढ़ी को उसके मूल उद्देश्य से विचलित कर रहा है। ऐसे समय में सत्संग एक दीपस्तंभ की भांति है, जो भटके हुए मन को दिशा देता है और जीवन को सार्थकता की ओर अग्रसर करता है।

महादेव कुड़ियाल ने सेवा, सिमरन और सत्संग को जीवन के तीन ऐसे स्तंभ बताया, जिन पर संतुलित और सफल जीवन की नींव रखी जाती है। सेवा से अहंकार का क्षय होता है, सिमरन से आत्मा निर्मल होती है और सत्संग से विवेक का प्रकाश उत्पन्न होता है। यह त्रिवेणी ही मनुष्य को पूर्णता की ओर ले जाती है।

उन्होंने गुरु की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि गुरु केवल मार्गदर्शक नहीं, बल्कि वह चेतना हैं, जो अज्ञान के अंधकार को हटाकर सत्य का प्रकाश फैलाती हैं। यदि युवा वर्ग गुरु की शिक्षाओं को अपने आचरण में उतार ले, तो वह स्वयं के साथ-साथ समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन का वाहक बन सकता है।

कार्यक्रम के समापन पर देहरादून बाईपास भवन के मुखी ज्ञानेश्वर गुरंग ने सभी उपस्थित संगत के प्रति आभार प्रकट करते हुए इस आध्यात्मिक संगम को जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया।

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