मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बोले— सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ जन-आंदोलन बनाकर उत्तराखंड को बनाएंगे प्लास्टिक मुक्त
अमीषा भट्ट
विश्व बाघ दिवस पर मुख्यमंत्री धामी का आह्वान, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी पर दिया विशेष जोरदेहरादून, 30 जुलाई। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक मुक्त बनाने का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से पूरा नहीं होगा, बल्कि इसके लिए जनभागीदारी, जन-जागरूकता और प्रत्येक नागरिक के सक्रिय सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विरुद्ध अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देकर ही इस दिशा में प्रभावी सफलता प्राप्त की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने विश्व बाघ दिवस के अवसर पर जाखन स्थित एक होटल में आयोजित “एकल उपयोग प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रवर्तन” विषयक राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने बाघ संरक्षण पर आधारित चित्र एवं पोस्टकार्ड का विमोचन किया तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष में साहसिक भूमिका निभाने और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व बाघ दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति, वन्यजीवों और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ भविष्य सुनिश्चित करने का सामूहिक संकल्प है।
उन्होंने कहा कि बाघ हमारी समृद्ध जैव विविधता और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतीक हैं। यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो बाघ भी सुरक्षित रहेंगे और पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहेगा।उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को माता का स्वरूप माना गया है। देवभूमि उत्तराखंड अपनी समृद्ध वन संपदा, जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के लिए पूरे देश में विशिष्ट पहचान रखता है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व प्रदेश की इस प्राकृतिक धरोहर के प्रमुख प्रतीक हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक आज पर्यावरण, नदियों, मिट्टी, जल स्रोतों और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। वन क्षेत्रों में फेंका गया प्लास्टिक कई बार वन्यजीवों के भोजन में मिल जाता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि जंगलों, नदियों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ प्रभावी और निर्णायक अभियान समय की मांग है।मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित स्वच्छ भारत अभियान, एक पेड़ माँ के नाम, नमामि गंगे तथा स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन अभियानों ने पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन से ही सतत विकास का लक्ष्य साकार किया जा सकता है।मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान, नियमित निरीक्षण और प्रवर्तन की कार्रवाई कर रही है। चारधाम यात्रा मार्गों और प्रमुख पर्यटन स्थलों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान संचालित किए जा रहे हैं।
साथ ही प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं रीसाइक्लिंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।उन्होंने प्रदेशवासियों से कपड़े के थैले, जूट तथा अन्य पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को अपनाने की अपील की। साथ ही उत्तराखंड आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक अथवा अन्य प्रकार का कचरा न छोड़ने का आग्रह किया। उद्योग जगत से इको-फ्रेंडली पैकेजिंग और आधुनिक रीसाइक्लिंग तकनीकों को अपनाने तथा युवाओं से विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम सभाओं, स्वयं सहायता समूहों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला से प्राप्त सुझाव उत्तराखंड में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन को और अधिक सुदृढ़ करेंगे तथा राज्य को प्लास्टिक मुक्त बनाने के संकल्प को नई दिशा प्रदान करेंगे।इस अवसर पर देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष टिहरी सुश्री इशिता सजवाण, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) कपिल लाल, प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) नीना ग्रेवाल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते सहित अनेक अधिकारी एवं विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
