राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में शामिल हुए कृषि मंत्री गणेश जोशी, जैविक और प्राकृतिक खेती पर दिया जोर

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नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन—खरीफ अभियान 2026 के समापन कार्यक्रम में उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जैविक, प्राकृतिक और क्लस्टर खेती को बढ़ावा देने के साथ किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है।

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नई दिल्ली, 29 मई। नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन—खरीफ अभियान 2026 के समापन कार्यक्रम में उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने भाग लिया। यह सम्मेलन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता और गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत की उपस्थिति में आयोजित किया गया।

दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में देशभर से आए कृषि विशेषज्ञों, अधिकारियों और विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों ने खरीफ फसलों की तैयारियों, कृषि क्षेत्र की चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की। सम्मेलन में खेती-किसानी से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल खरीफ सत्र की तैयारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के हित, कृषि क्षेत्र के विकास और राज्यों के नवाचारों को साझा करने का माध्यम भी है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति और जलवायु विविध फसलों के उत्पादन के लिए अनुकूल है। खरीफ सत्र 2026 को लेकर प्रदेश में सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राज्य में बीज, खाद और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

गणेश जोशी ने बताया कि उत्तराखंड में लगभग 90 प्रतिशत किसान लघु और सीमांत श्रेणी के हैं। छोटी और बिखरी जोतों के कारण कृषि को व्यावसायिक और व्यवस्थित रूप देना चुनौतीपूर्ण है। इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार क्लस्टर आधारित खेती को प्रोत्साहित कर रही है।

कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है। उर्वरकों की खपत कम करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। “धरती माता बचाओ अभियान” के तहत संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक खेती को लेकर विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। साथ ही खाद और उर्वरकों की जमाखोरी व कालाबाजारी पर भी निगरानी रखी जा रही है।

उन्होंने बताया कि परंपरागत कृषि विकास योजना और नमामि गंगे योजना के माध्यम से प्रदेश में जैविक खेती को लगातार बढ़ावा मिल रहा है। अब तक राज्य में लगभग 2.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र जैविक खेती के अंतर्गत लाया जा चुका है, जो कुल कृषि क्षेत्र का लगभग 40 प्रतिशत है। जैविक उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख पर्यटक और धार्मिक स्थलों पर 337 जैविक आउटलेट स्थापित किए गए हैं।

गणेश जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत उत्तराखंड के 11 जनपदों में 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही “नमामि गंगे प्राकृतिक कृषि कॉरिडोर योजना” के अंतर्गत 1950 हेक्टेयर क्षेत्रफल में काम शुरू किया गया है।

मंत्री ने बताया कि मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य में वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक 134.89 करोड़ रुपये की स्टेट मिलेट पॉलिसी लागू की गई है। वहीं, कृषक उत्पादक संगठन यानी एफपीओ योजना के तहत अब तक प्रदेश में 161 एफपीओ गठित किए जा चुके हैं। प्रत्येक विकासखंड में एफपीओ गठन को सुनिश्चित किया गया है।

अंत में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में हुई चर्चा किसानों की उन्नति, कृषि क्षेत्र के समग्र विकास और किसानों की आय बढ़ाने के संकल्प को नई दिशा देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों से कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भरता और समृद्धि की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा।

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