वसुंधरा ताल में पूर्व चेतावनी प्रणाली का पहला चरण सफल: अत्याधुनिक सेंसर से होगी निगरानी, सीएम धामी ने जताई प्रसन्नता
उत्तराखंड में ग्लेशियल झीलों से संभावित ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ (GLOF) के खतरों से निपटने और समय रहते चेतावनी जारी करने की दिशा में राज्य को बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि मिली है। चमोली जनपद स्थित 38.50 मीटर गहरी वसुंधरा ताल में पूर्व चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) स्थापित करने गया वैज्ञानिक एवं तकनीकी दल अपना पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा कर देहरादून लौट आया है। इस अभियान में सीबीआरआई (CBRI) रुड़की, वाडिया संस्थान, यूएसडीएमए (USDMA) के वैज्ञानिकों के साथ एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और आईटीबीपी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

झील और उसके आसपास अत्याधुनिक ऑल-इन-वन मौसम सेंसर, वाटर लेवल सेंसर, एक्सेलेरोमीटर, टिल्ट और स्नो डेप्थ सेंसर लगाए गए हैं, जो सामान्य स्थिति में हर दो घंटे और आपात स्थिति में तुरंत आंकड़े भेजेंगे। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण डेटा भेजने के लिए इरिडियम उपग्रह संचार और ऊर्जा बैकअप के लिए 10 दिनों की क्षमता वाली सौर ऊर्जा प्रणाली का उपयोग किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे हिमालयी क्षेत्रों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण और जनसुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है।
