रेड अलर्ट के बीच ग्राउंड जीरो पर पहुंचे डीएम आशीष चौहान
सहस्रधारा-सरोना मार्ग तत्काल खोलने के निर्देश,
कार्लीगढ़ व सपेरा बस्ती में सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने पर जोर
देहरादून, 10 जुलाई। उत्तराखंड में मौसम विभाग के रेड अलर्ट और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
संभावित आपदा की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने गुरुवार को स्वयं ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर सहस्रधारा, कार्लीगढ़ और अति संवेदनशील सपेरा बस्ती का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लेने के साथ स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को राहत एवं सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।
चार स्थानों पर बंद सहस्रधारा-सरोना मार्ग तत्काल खोलने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी सबसे पहले सहस्रधारा-सरोना मोटर मार्ग पहुंचे, जहां लगातार बारिश के कारण मलबा आने से मार्ग चार अलग-अलग स्थानों पर अवरुद्ध हो गया है। मौके पर मौजूद पीएमजीएसवाई अधिकारियों ने बताया कि पिछली आपदा में भी यह मार्ग 11 से अधिक स्थानों पर क्षतिग्रस्त हुआ था, जिसे अस्थायी रूप से बहाल किया गया था। स्थायी सुरक्षा कार्य नहीं होने के कारण हल्की बारिश में भी मार्ग बार-बार बाधित हो जाता है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने दोनों ओर से जेसीबी मशीनें लगाकर तत्काल मलबा हटाने और मार्ग को शीघ्र यातायात के लिए खोलने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस मार्ग के स्थायी उपचार एवं सुरक्षा कार्यों के लिए शासन स्तर पर भी आवश्यक पहल की जाएगी, ताकि भविष्य में लोगों को बार-बार इस समस्या का सामना न करना पड़े।
कार्लीगढ़ में नदी पार रहने वाले परिवारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
कार्लीगढ़ क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान सिंचाई विभाग ने बताया कि पिछली आपदा से प्रभावित क्षेत्र में मलबा हटाने, समतलीकरण और नदी की चैनलाइजेशन का कार्य पूरा कर लिया गया है। हालांकि नदी के दूसरी ओर रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर जिलाधिकारी ने विशेष चिंता जताई।
उन्होंने तहसील प्रशासन को निर्देश दिए कि सभी परिवारों के पास पर्याप्त राशन, पेयजल और बिजली की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही सभी परिवारों के मोबाइल नंबर जिला आपातकालीन नियंत्रण कक्ष में दर्ज किए जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते उन्हें अलर्ट कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
सपेरा बस्ती में स्थानीय लोगों से किया संवाद, असुरक्षित मकानों को खाली कराने के निर्देश
आपदा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील मानी जाने वाली सपेरा बस्ती में जिलाधिकारी ने स्थानीय निवासियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं जानीं। उन्होंने नाले के उपचार, क्षतिग्रस्त सुरक्षा दीवारों की मरम्मत तथा अन्य सुरक्षात्मक कार्यों का तत्काल आकलन कर कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए।
नगर निगम अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि जिन मकानों पर खतरा मंडरा रहा है, वहां रहने वाले लोगों को बिना देरी सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बारिश के दौरान लोगों को समय पर सतर्क करने के लिए प्रभावी अलर्ट सिस्टम तैयार रखा जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
यमुना खतरे के निशान पर, कई सड़कें अब भी बाधित
जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, गुरुवार को जनपद में औसतन 25.75 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंच गया है, जबकि गंगा और टोंस नदी का जलस्तर फिलहाल खतरे के निशान से नीचे है।
भूस्खलन और मलबा आने के कारण हरिपुर-इच्छाड़ी-कुवानू-मीनास राज्य मार्ग तीन स्थानों पर अवरुद्ध है, जिसे प्रशासन द्वारा शाम तक खोलने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा जिले के 14 ग्रामीण मार्ग भी बंद हैं, जिन्हें खोलने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
निरीक्षण के दौरान पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता रघुवीर सिंह गुसाईं, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता दीक्षांत गुप्ता, नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आनंद, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि बरसात के दौरान आमजन की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी विभाग समन्वय के साथ लगातार निगरानी बनाए रखें और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करें।
