न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे सख्त: उत्तराखंड के हर जिले का लक्ष्य ‘जीरो फैटलिटी’, सड़क हादसों पर कसेगा शिकंजा
अमीषा भट्ट
सड़क हादसों पर सुप्रीम कोर्ट कमेटी सख्त, उत्तराखंड में अब हर जिले का लक्ष्य ‘जीरो फैटलिटी’
न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने अधिकारियों के साथ की समीक्षा, नियम तोड़ने वालों पर बढ़ेगी कार्रवाई
अगस्त तक 1480 सड़क दुर्घटनाओं में 884 लोगों की मौत, देहरादून, ऊधमसिंहनगर और हरिद्वार में सबसे अधिक हादसे
उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और उनमें हो रही जनहानि को रोकने के लिए अब सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया जाएगा। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने मुख्य सचिव, संबंधित विभागों के अधिकारियों और सभी जिलाधिकारियों के साथ सड़क सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। बैठक में दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान से लेकर यातायात नियमों के पालन और हादसे के बाद त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तक कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।
समीक्षा में सामने आया कि वर्ष 2026 में अगस्त तक प्रदेश में 1480 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 884 लोगों की मौत हुई, जबकि 1626 लोग घायल हुए। जनपदवार स्थिति में देहरादून, ऊधमसिंहनगर, हरिद्वार और नैनीताल सबसे अधिक प्रभावित जिलों में रहे। इन जिलों में क्रमशः 131, 229, 213 और 104 लोगों की मौत हुई। वहीं घायलों की संख्या क्रमशः 322, 338, 279 और 334 रही।
कमेटी ने प्रदेश के प्रत्येक जिले को ‘जीरो फेटलिटी जिला’ बनाने की दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मानकों के अनुरूप दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर प्रभावी सुरक्षा उपाय लागू करने पर जोर दिया गया।
बैठक में सरकारी कर्मचारियों और संस्थानों में कार्यरत कार्मिकों को यातायात नियमों के पालन के लिए प्रोत्साहित करने के साथ ‘No Helmet-No Entry’, ‘No Entry Without Driving Licence’ और ‘No Entry Without Insurance’ जैसी व्यवस्थाएं लागू करने पर भी जोर दिया गया। स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए भी सड़क सुरक्षा नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
वाहन चालकों को लाइसेंस जारी करने से पहले कंप्यूटर आधारित परीक्षा और परिवहन कार्यालयों में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक को प्राथमिकता देने को कहा गया। देहरादून और हरिद्वार में निर्माणाधीन चिल्ड्रन ट्रैफिक पार्क में दोपहिया और चार पहिया वाहनों के सिमुलेटर लगाने के लिए वाहन निर्माता कंपनियों से सहयोग लेने के निर्देश भी दिए गए।
चारधाम यात्रा मार्गों पर निगरानी बढ़ाने और एनएचएआई के कैमरों के माध्यम से यातायात नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने को कहा गया। पर्वतीय मार्गों पर क्रैश बैरियर, दुर्घटना के ‘गोल्डन ऑवर’ में तत्काल चिकित्सा सुविधा और आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी नीति बनाने के निर्देश दिए गए। कमेटी ने दुर्घटनाओं के विश्लेषण के आधार पर कारणों की पहचान और रोकथाम के उपायों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को भी कहा।
