मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने 25 बिंदु कार्यक्रम की समीक्षा, योजनाओं के जमीनी असर पर दिया जोर
अमीषा भट्ट
25 बिंदु कार्यक्रम की समीक्षा, योजनाओं के जमीनी असर पर जोर
मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने अधिकारियों को दिए निर्देश, हर माह जिलों में होगी कार्यक्रम की समीक्षा
देहरादून 01 अक्टूबर : प्रदेश में सरकारी योजनाओं की प्रगति को अब केवल आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि आमजन को मिल रहे वास्तविक लाभ के आधार पर भी परखा जाएगा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में 25 बिंदु कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को योजनाओं की प्रगति के साथ उनके धरातल पर पड़ने वाले प्रभाव का भी नियमित आकलन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी योजना की सफलता इस बात से तय होनी चाहिए कि उसका लाभ कितने लोगों तक पहुंचा और उससे उनके जीवन में कितना बदलाव आया।
बैठक में पिरूल कलेक्शन योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से पिरूल कलेक्शन से जुड़े लाभार्थियों को अब तक हुई मॉनेटाइजेशन, इससे लाभान्वित लोगों की संख्या और उनकी आय में हुए इजाफे का पूरा आंकड़ा तैयार करने को कहा। उन्होंने कहा कि योजना के तहत केवल पिरूल एकत्र करने के आंकड़े पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि इससे स्थानीय लोगों की आय और रोजगार के अवसरों में कितना इजाफा हुआ।
कचरा प्रबंधन को लेकर मुख्य सचिव ने डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन और सेग्रिगेशन व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कचरे के संग्रहण से लेकर उसके पृथक्करण और निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया की नियमित निगरानी की जाए। स्थानीय स्तर पर व्यवस्था में आने वाली कमियों की पहचान कर उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी की व्यवस्था को लेकर भी बैठक में विशेष जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों और सचिव पेयजल को एसटीपी से संबंधित कार्यों की नियमित निगरानी करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश में स्थापित एसटीपी का उनकी क्षमता के अनुरूप पूरा उपयोग सुनिश्चित किया जाए। साथ ही सभी एसटीपी की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए केंद्रीकृत मैकेनिज्म तैयार करने के निर्देश दिए गए, जिससे प्लांट के संचालन और निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन पर लगातार नजर रखी जा सके।
मुख्य सचिव ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बड़े कमर्शियल संस्थानों और ग्रुप हाउसिंग में उनके स्वयं के एसटीपी की व्यवस्था को गंभीरता से लागू कराने को कहा। उन्होंने संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करने और मानकों की नियमित जांच के निर्देश दिए।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि अभियान केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जिन स्थानों से अतिक्रमण हटाया गया है, वहां दोबारा अतिक्रमण न हो, इसके लिए जिलास्तर पर नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए। वहीं पार्किंग से जुड़ी लंबित योजनाओं में तेजी लाने और सामने आ रही बाधाओं का समयबद्ध समाधान करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में हर माह 25 बिंदु कार्यक्रम की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समीक्षा के दौरान आंकड़ों के साथ योजनाओं की जमीनी स्थिति, लाभार्थियों को मिल रहे वास्तविक लाभ और सामने आ रही समस्याओं पर भी चर्चा हो। जिन बिंदुओं पर अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है, उनके कारणों की पहचान कर सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बैठक में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, डॉ. आर. राजेश कुमार, विनोद कुमार सुमन, युगल किशोर पंत और धीराज सिंह गर्ब्याल समेत संबंधित विभागों के सचिव, अपर सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
