स्वामी रामतीर्थ परिसर में शोध, संवाद और सृजन का संगम—“मंथन” की पहल सफल

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टिहरी गढ़वाल। हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के स्वामी रामतीर्थ परिसर, बादशाही थौल में शोधार्थियों द्वारा स्थापित अंतर्विषयी रचनात्मक मंच “मंथन” बौद्धिक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है। शोधार्थियों के अकादमिक, बौद्धिक एवं रचनात्मक विकास को ध्यान में रखते हुए प्रारंभ किया गया यह मंच अब संवाद और विचार-विनिमय की नई संस्कृति को प्रोत्साहित कर रहा है।

“मंथन” मंच का उद्देश्य विभिन्न विषयों के शोधार्थियों के बीच संवाद स्थापित करना, विचारों का आदान-प्रदान करना तथा आत्म-अभिव्यक्ति के लिए एक सकारात्मक और स्वतंत्र वातावरण प्रदान करना है। वर्तमान समय में शोध का स्वरूप बहुआयामी हो चुका है, ऐसे में यह मंच शोधार्थियों को अपने विचारों, अनुभवों और रचनात्मक प्रतिभा को निःसंकोच प्रस्तुत करने का अवसर दे रहा है।

मंच को परिसर के निदेशक प्रो० ए० ए० बौडाई का संरक्षण एवं मार्गदर्शन प्राप्त है। मंच के संचालन में संयोजक धनेश्वर द्विवेदी, सह-संयोजक सुनील कुमार, समन्वयक यशिका राणा तथा सह-समन्वयक मनोज सिंह सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

08 अप्रैल को आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ, जिससे वातावरण आध्यात्मिक एवं गरिमामय बन गया। इस अवसर पर संयोजक धनेश्वर द्विवेदी ने “मंथन” को एक सतत बौद्धिक यात्रा बताते हुए कहा कि यह मंच नए दृष्टिकोणों को जन्म देने में सहायक है।

सह-संयोजक सुनील कुमार ने इसे ज्ञानवर्धन के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम बताया। वहीं समन्वयक यशिका राणा ने कहा कि मंच विभिन्न विषयों के शोधार्थियों को एक साझा मंच प्रदान कर उन्हें एक-दूसरे से सीखने का अवसर देता है। सह-समन्वयक मनोज सिंह ने “मंथन” को रचनात्मकता और साहित्यिक चेतना को बढ़ावा देने वाला मंच बताया।

कार्यक्रम में शोधार्थिनी सृष्टि शर्मा ने “सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में क्षेत्र कार्य का महत्व” विषय पर प्रस्तुति दी, जबकि संस्कृत विभाग के शोधार्थी द्विवेदी ने “भारतीय ज्ञान परंपरा में मानव मूल्य एवं नैतिक शिक्षा” पर विचार रखे। दिव्या काला और मनोज सिंह ने अपनी स्वरचित कविताओं से कार्यक्रम को साहित्यिक रंग प्रदान किया।

इसके अतिरिक्त सुनील कुमार ने “शैक्षणिक आयोजनों की शब्दावली” विषय पर ज्ञानवर्धक प्रस्तुति दी तथा सुधांशु सोनी ने अपने शोध से जुड़े मौलिक विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी में यशिका राणा एवं हिंदी में मनोज सिंह द्वारा किया गया, जबकि अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन शांति-पाठ के साथ हुआ।

इस अवसर पर सृष्टि शर्मा, प्रियंका बिष्ट, सुधांशु सोनी, त्रिलोक नाथ, वैशाली जोशी, रश्मि राणा सहित अनेक शोधार्थी उपस्थित रहे।

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