आरटीओ डॉ. अनीता चमोला बोलीं— वाहन चलाना ही नहीं, विद्यार्थियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना भी बड़ी जिम्मेदारी
आरटीओ डॉ. अनीता चमोला बोलीं— वाहन चलाना ही नहीं, विद्यार्थियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना भी बड़ी जिम्मेदारी
देहरादून, 25 जून: स्कूल वाहनों में सफर करने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग उत्तराखंड के सौजन्य तथा आरटीओ देहरादून (प्रवर्तन एवं सड़क सुरक्षा) की पहल पर आईडीटीआर (इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च) देहरादून में स्कूल बस चालकों एवं परिचालकों के लिए विशेष सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, सेंट पैट्रिक एकेडमी और सोशल बलूनी स्कूल के कुल 46 चालक एवं परिचालकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूल बसों में यात्रा करने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा वाहन चालकों और परिचालकों को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति अधिक जागरूक एवं प्रशिक्षित बनाना था। निशुल्क आयोजित इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की व्यवहारिक जानकारी प्रदान की गई।
प्रशिक्षण के दौरान रोड साइन, रोड मार्किंग, प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), डिफेंसिव ड्राइविंग, एमएसएम-पीएसएल तकनीक, स्कूल बस संचालन के निर्धारित मानकों, बच्चों को सुरक्षित तरीके से चढ़ाने एवं उतारने, वाहन फिटनेस, गति नियंत्रण तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया जैसे विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।
इस अवसर पर संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन एवं सड़क सुरक्षा) डॉ. अनीता चमोला ने कहा कि स्कूल बस चालक और परिचालक केवल वाहन संचालन का कार्य नहीं करते, बल्कि वे बच्चों की सुरक्षा के सबसे महत्वपूर्ण संरक्षक होते हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को विश्वास के साथ स्कूल वाहनों में भेजते हैं, इसलिए स्कूल परिवहन व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह निर्धारित नियमों, सुरक्षा मानकों और यातायात नियमों का पूरी जिम्मेदारी के साथ पालन करे।
डॉ. चमोला ने कहा कि स्कूल बस संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे बच्चों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। इसलिए चालक और परिचालकों को सतर्कता, अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए।
कार्यक्रम में संयुक्त परिवहन आयुक्त उत्तराखंड राजीव कुमार मेहरा ने प्रतिभागियों से संवाद करते हुए कहा कि स्कूल बस चालक समाज के सबसे जिम्मेदार चालकों में शामिल हैं, क्योंकि उनके हाथों में बच्चों की सुरक्षित यात्रा की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन बचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। सुरक्षित ड्राइविंग और यातायात नियमों के पालन से दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
आईडीटीआर देहरादून द्वारा संचालित प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को आधुनिक प्रशिक्षण तकनीकों और व्यवहारिक अभ्यासों के माध्यम से सड़क सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया। संस्थान के विशेषज्ञों ने सुरक्षित वाहन संचालन, सड़क संकेतों की समझ, वाहन नियंत्रण तकनीक तथा आपदा एवं आपातकालीन स्थितियों में सही निर्णय लेने के तरीकों पर प्रशिक्षण दिया।
प्रशिक्षण को रोचक और प्रभावी बनाने के लिए क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। विजेताओं में सेंट पैट्रिक एकेडमी के रिजवान और अली खान, सोशल बलूनी स्कूल की काजल और सुमन तथा शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के राजेंद्र शामिल रहे।
आईडीटीआर के उप निदेशक रोहित गुप्ता ने कहा कि परिवहन विभाग और आरटीओ देहरादून के सहयोग से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी को अपने दैनिक कार्यों में लागू करने की अपील की।
कार्यक्रम के समापन पर सभी 46 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। साथ ही आईडीटीआर की ओर से प्रतिभागियों को टी-शर्ट भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। परिवहन विभाग ने भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की बात कही, ताकि स्कूल परिवहन व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित एवं जिम्मेदार बनाया जा सके।
