सचिव विनोद कुमार सुमन बोले: सेना और यूएसडीएमए के बीच समन्वय होगा और मजबूत, आपदा राहत के लिए बनी साझा रणनीति
अमीषा भट्ट
आपदा के दौरान त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों के लिए बनी साझा रणनीति, गोल्डन ऑवर में प्रभावी रिस्पॉन्स पर जोर देहरादून, 30 जुलाई। उत्तराखण्ड में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी, त्वरित एवं समन्वित बनाने के उद्देश्य से बुधवार को उत्तराखण्ड सब एरिया में उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) और भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई।
बैठक में मानसून सहित विभिन्न आपदा परिस्थितियों से निपटने के लिए संयुक्त कार्ययोजना, संसाधनों के बेहतर उपयोग और आपसी समन्वय को मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक को संबोधित करते हुए आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे आपदा संभावित राज्य में भारतीय सेना हमेशा एक भरोसेमंद सहयोगी रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में जब भी किसी बड़ी आपदा की स्थिति बनी है, सेना ने अपनी तत्परता, संवेदनशीलता और पेशेवर दक्षता के साथ राहत एवं बचाव कार्यों में अहम भूमिका निभाई है।उन्होंने वर्ष 2024 की केदारघाटी आपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सेना और वायु सेना ने हजारों तीर्थयात्रियों एवं स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में उल्लेखनीय योगदान दिया।

वहीं वर्ष 2025 में धराली सहित अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भी सेना ने राहत एवं बचाव अभियान के साथ आवश्यक मशीनरी, उपकरण और संसाधनों को दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचाने तथा प्रभावित लोगों की सुरक्षित निकासी में सराहनीय कार्य किया।सचिव ने कहा कि राज्य सरकार और यूएसडीएमए सेना के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और आपदा प्रबंधन से जुड़े हर विषय पर विभागीय स्तर पर हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।बैठक में उत्तराखण्ड सब एरिया के डिप्टी जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) ब्रिगेडियर आर.एस. थापा ने कहा कि आपदा के समय भारतीय सेना का सर्वोच्च उद्देश्य मानव जीवन की रक्षा करना होता है।
उन्होंने कहा कि सेना उत्तराखण्ड में किसी भी प्रकार की आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए हमेशा तैयार रहती है और यूएसडीएमए के साथ समन्वय को लगातार और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है।
ब्रिगेडियर थापा ने कहा कि सेना का विशेष प्रयास रहता है कि आपदा के गोल्डन ऑवर के दौरान ही राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया जाए, क्योंकि शुरुआती समय में की गई त्वरित कार्रवाई अधिक से अधिक लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण साबित होती है।क्यूआरटी में सेना की सहभागिता और आईडीआरएन पोर्टल पर संसाधनों का होगा उपयोगबैठक के दौरान सचिव विनोद कुमार सुमन ने सेना से अनुरोध किया कि राहत एवं बचाव कार्यों में उपयोग होने वाले उपकरणों, मशीनरी और संसाधनों का विवरण इंडिया डिजास्टर रिसोर्स नेटवर्क (आईडीआरएन) पोर्टल पर अपलोड किया जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न एजेंसियां इन संसाधनों का शीघ्र और प्रभावी उपयोग कर सकें।इसके साथ ही विभिन्न जनपदों में गठित क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) में सेना की सहभागिता बढ़ाने तथा पूर्व सैनिकों के अनुभव और विशेषज्ञता का उपयोग राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने पर भी विस्तृत मंथन किया गया।
बैठक में यूएसडीएमए के एसीईओ (प्रशासन) प्रकाश चंद्र, एसीईओ (क्रियान्वयन) डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा सहित यूएसडीएमए के विशेषज्ञ और भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
