सीडीओ अभिनव शाह ने किया दून बासमती की फसल का निरीक्षण, किसानों की बढ़ीं उम्मीदें

0
Screenshot_20261003_190815_WhatsApp_copy_968x538

अमीषा भट्ट

*खेतों में लहलहाई दून बासमती की फसल, किसानों की बढ़ीं उम्मीदें*

*सीडीओ अभिनव शाह ने विकासनगर के चार गांवों में पहुंचकर किया फसल का स्थलीय निरीक्षण, किसानों से संवाद कर जानीं समस्याएं*

*दून बासमती का उचित मूल्य तय करने और प्रमाणित बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सीडीओ ने दिए निर्देश*

*देहरादून, 03 अक्टूबर, 2026 (सू.वि.)*

दून बासमती के पुनर्जीवन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के तहत विकासनगर क्षेत्र के खेतों में लहलहाती दून बासमती की फसल किसानों के लिए नई उम्मीदें लेकर आई है। मुख्य विकास अधिकारी, अभिनव शाह, ने शनिवार को विकासनगर ब्लॉक के जस्सोवाला, ढकरानी, हरबर्टपुर और फतेहपुर ग्रांट गांवों का भ्रमण कर दून बासमती की फसल का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने फसल की स्थिति, गुणवत्ता और उत्पादन की संभावनाओं का जायजा लेने के साथ ही किसानों से सीधे संवाद कर खेती में आ रही समस्याओं और उनकी अपेक्षाओं की जानकारी ली।

मुख्य विकास अधिकारी ने फसल कटाई से लगभग एक माह पूर्व खेतों में पहुंचकर फसल की प्रगति का आकलन किया। इस दौरान किसानों ने जैविक खेती में आ रही चुनौतियों, गुणवत्तापूर्ण बीज की समय पर उपलब्धता, फसल बीमा के दावों के निस्तारण में देरी तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से अवगत कराया। सीडीओ ने कृषि विभाग को किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, गोष्ठियों और जागरूकता गतिविधियों का आयोजन करने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें वैज्ञानिक एवं उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी मिल सके।

जस्सोवाला गांव में आठ बीघा भूमि पर दून बासमती की खेती कर रहे किसान दिनेश गौड़ ने बताया कि इस किस्म की खेती में अपेक्षाकृत कम लागत आने से किसानों में इसके प्रति उत्साह बढ़ रहा है। उन्होंने दून बासमती का बेहतर मूल्य निर्धारित कर किसानों से खरीद सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि उन्हें उपज का उचित लाभ मिल सके।

*पिछले वर्ष 65 हेक्टेयर में हुई थी खेती, इस वर्ष 75 हेक्टेयर का लक्ष्य*

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि दून बासमती के पुनर्जीवन के प्रयासों के तहत पिछले वर्ष 65 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती कराई गई थी। ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (रीप) के माध्यम से किसानों से सीधे उपज की खरीद की गई, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। इसी उत्साहजनक अनुभव को देखते हुए इस वर्ष दून बासमती की खेती का क्षेत्रफल बढ़ाकर 75 हेक्टेयर किया गया है।

उन्होंने बताया कि फसल कटाई से पूर्व स्थलीय निरीक्षण का उद्देश्य उत्पादन की स्थिति का आकलन करने के साथ ही किसानों की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाना है। रीप के माध्यम से दून बासमती की खरीद कर ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ की मांग को पूरा करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इससे किसानों को बाजार से जोड़ने और उनकी उपज के विपणन को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।

*उचित मूल्य निर्धारण और सीड बैंक बनाने के निर्देश*

निरीक्षण के दौरान किसानों द्वारा उपज के उचित मूल्य और प्रमाणित बीज की उपलब्धता से संबंधित समस्याएं उठाए जाने पर मुख्य विकास अधिकारी ने रीप (ग्रामोत्थान) तथा कृषि विभाग के अधिकारियों को दून बासमती का मूल्य शीघ्र निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने दून बासमती के प्रमाणित बीज की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सीड बैंक तैयार करने को कहा। सीडीओ ने स्पष्ट किया कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के साथ ही उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था की जाए।

*अमूल्य निधि ऑर्गेनिक फार्म का भ्रमण कर जैविक खेती के प्रयासों को सराहा*

विकासनगर क्षेत्र के हरबर्टपुर में दून बासमती की खेती कर रहे किसान सूर्य प्रकाश बहुगुणा ने मुख्य विकास अधिकारी को अपने अमूल्य निधि ऑर्गेनिक फार्म का भ्रमण कराया। इस दौरान सीडीओ ने फार्म में संचालित जैविक खेती की गतिविधियों का जायजा लिया और विभिन्न उत्पादों के उत्पादन एवं प्रसंस्करण से संबंधित जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने फार्म में उत्पादित जैविक सब्जियों एवं अन्य जैविक उत्पादों का निरीक्षण किया। साथ ही जैविक नर्सरी, जैविक कम्पोस्ट और अन्य गतिविधियों के माध्यम से अपनाई जा रही जैविक कृषि पद्धतियों की सराहना की।

स्थलीय निरीक्षण के दौरान जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, मुख्य कृषि अधिकारी देवेंद्र राणा, खंड विकास अधिकारी विकासनगर सोनम गुप्ता, जिला परियोजना प्रबंधक अशोक चतुर्वेदी, प्रभारी अधिकारी वीबी-जी राम जी शक्ति प्रसाद भट्ट सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और किसान उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed