विश्व पर्यावरण दिवस पर वेस्ट वॉरियर्स ने साझा की 2025-26 की उपलब्धियां

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देहरादून। विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर वेस्ट वॉरियर्स संस्था ने उत्तराखंड में अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान किए गए कार्यों और उपलब्धियों की जानकारी साझा की।

संस्था के अनुसार, वर्ष 2025-26 में समुदाय आधारित कार्यक्रमों, सफाई अभियानों और पुनर्चक्रण से जुड़ी पहलों के माध्यम से कुल 1,081 मीट्रिक टन सूखे कचरे का संग्रहण किया गया। इसके साथ ही 364 मीट्रिक टन प्लास्टिक अपशिष्ट को प्रसंस्करण के लिए भेजा गया। संस्था ने इसे वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब हिमालयी क्षेत्रों में कचरे की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन, आबादी और उपभोग बढ़ने के कारण ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में स्थानीय समुदायों की भागीदारी और व्यवस्थित कचरा प्रबंधन मॉडल की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है।

वेस्ट वॉरियर्स वर्तमान में उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कार्यक्रम चला रहा है। इनमें हर्रावाला वार्ड 97, धनोला ग्राम पंचायत, गोविंद वन्यजीव विहार के आसपास के गांव और ट्रेकिंग मार्ग, कैम्पटी फॉल्स पर्यटन क्षेत्र, जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के गांव, आसन वेटलैंड क्षेत्र और स्वच्छता एक्सप्रेस पहल शामिल हैं।

संस्था अपने पर्यावरण सखी मॉडल के माध्यम से स्थानीय महिलाओं को भी कचरा संग्रहण, कचरा पृथक्करण और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ रही है। इस मॉडल के जरिए महिलाओं को सम्मानजनक और सतत आजीविका के अवसर मिल रहे हैं, साथ ही समुदाय स्तर पर स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है।

वेस्ट वॉरियर्स संस्था के एसोसिएट डायरेक्टर नवीन कुमार सडाना ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 10 लाख किलोग्राम से अधिक सूखे कचरे का संग्रहण और 3.5 लाख किलोग्राम से अधिक प्लास्टिक अपशिष्ट का प्रसंस्करण सामुदायिक भागीदारी की ताकत को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि बढ़ते कचरा संकट से निपटने के लिए स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, पुनर्चक्रण व्यवस्था और जन-जागरूकता को और मजबूत करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस हमें स्वच्छ, स्वस्थ और टिकाऊ भविष्य के निर्माण के लिए अपनी जिम्मेदारियों को याद दिलाता है। संस्था आगे भी उत्तराखंड में कचरा प्रबंधन, पुनर्चक्रण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी पहलों को मजबूत करने के लिए कार्य करती रहेगी।

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