नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट से ड्रॉपआउट बालिकाओं को मिलेगी शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ने की राह
स्नातक तक बालिकाओं की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन की बड़ी पहल
देहरादून, 5 जून। जनपद में स्कूल छोड़ चुकी बालिकाओं को दोबारा शिक्षा से जोड़ने और उन्हें उच्च शिक्षा तक पहुंचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने ‘नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट’ को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ड्रॉपआउट बालिकाओं की पहचान के लिए व्यापक सर्वे कराया जाए और उन्हें पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।

शुक्रवार को आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि किसी भी बालिका की पढ़ाई आर्थिक स्थिति, पारिवारिक जिम्मेदारियों या सामाजिक कारणों से रुकनी नहीं चाहिए। प्रशासन का प्रयास रहेगा कि जनपद की प्रत्येक बालिका को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिले और जरूरत पड़ने पर उसे योजनाओं व संसाधनों के माध्यम से सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
डीएम डॉ. चौहान ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक ऐसी सभी बालिकाओं का सर्वे कराया जाए, जिन्होंने किसी कारणवश पढ़ाई बीच में छोड़ दी है। सर्वे के बाद बालिकाओं का पुनः नामांकन कराते हुए उनकी पढ़ाई को नियमित बनाए रखने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य केवल विद्यालय में दोबारा प्रवेश दिलाना नहीं है, बल्कि बालिकाओं को कम से कम स्नातक स्तर तक पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित और सहयोगित करना है। उन्होंने कहा कि बालिका शिक्षा समाज को सशक्त बनाने की मजबूत नींव है और इसके लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आर्थिक रूप से कमजोर, पारिवारिक कारणों से प्रभावित या अन्य कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई छोड़ चुकी छात्राओं के लिए विशेष सहायता व्यवस्था बनाई जाए। पात्र बालिकाओं को छात्रवृत्ति, सरकारी योजनाओं और अन्य उपलब्ध संसाधनों से जोड़कर शिक्षा में आने वाली बाधाओं को दूर किया जाए।
बैठक में मुख्य शिक्षा अधिकारी को इस अभियान का नोडल अधिकारी नामित किया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि ड्रॉपआउट बालिकाओं की पहचान, पुनः नामांकन, शैक्षिक प्रगति और उच्च शिक्षा तक निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाए। इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग और समय-समय पर समीक्षा भी की जाएगी।
डीएम ने कहा कि नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट के माध्यम से जिला प्रशासन बालिकाओं को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जब बेटियां पढ़ेंगी, तभी समाज और अधिक मजबूत, जागरूक और सशक्त बनेगा।
