अग्निवीर रोजगार प्रकोष्ठ पर यूकेडी ने सरकार से पूछे 10 सवाल, कहा—घोषणा नहीं, सम्पूर्ण संक्रमण व्यवस्था चाहिए
अमीषा भट्ट
बिल्कुल। मैंने अंग्रेज़ी शब्दों को जहाँ संभव हो वहाँ **हिंदी में बदल दिया है**, और जहाँ तकनीकी/प्रचलित संक्षिप्त नाम आवश्यक हैं वहाँ उनका **हिंदी रूप/उच्चारण** रखा है। नीचे का पाठ **मंगल जैसे देवनागरी फ़ॉन्ट में सीधे कॉपी-पेस्ट करने योग्य** है।
## अग्निवीर रोज़गार प्रकोष्ठ: घोषणा से आगे, अब चाहिए सम्पूर्ण संक्रमण व्यवस्था
**देहरादून, 29 अगस्त 2026:** उत्तराखंड सरकार द्वारा **अग्निवीर रोज़गार प्रकोष्ठ** स्थापित करने के निर्णय का स्वागत करते हुए **उत्तराखंड क्रांति दल** ने कहा कि केवल एक रोज़गार प्रकोष्ठ बनाना पर्याप्त नहीं है। असली कसौटी यह होगी कि क्या राज्य प्रत्येक अग्निवीर को सैन्य सेवा से नागरिक जीवन में **सहज, निर्बाध और सम्मानजनक संक्रमण** उपलब्ध करा पाता है।
सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि नया प्रकोष्ठ केवल रोजगार, योजनाओं, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की जानकारी एवं समन्वय का माध्यम होगा या प्रत्येक अग्निवीर को **वास्तविक रोजगार अथवा उच्च शिक्षा/स्वरोजगार के स्पष्ट मार्ग** तक पहुँचाने की जिम्मेदारी भी इसी की होगी।
उत्तराखंड क्रांति दल के अनुसार सरकार की घोषणा में कई महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक प्रश्न अभी अनुत्तरित हैं। इन्हीं के आधार पर पार्टी ने सरकार के सामने निम्नलिखित **10 सवाल** रखे हैं:
1. प्रकोष्ठ की वास्तविक जिम्मेदारी क्या है?
क्या **अग्निवीर रोज़गार प्रकोष्ठ** केवल रिक्तियों, सरकारी योजनाओं, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की जानकारी देगा, या प्रत्येक अग्निवीर को वास्तविक रोजगार के अवसर तक पहुँचाना भी इसकी जिम्मेदारी होगी? यदि कोई अग्निवीर बेरोजगार रह जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी और जवाबदेही किसकी होगी?
2. संक्रमण की तैयारी कब शुरू होगी?
क्या प्रत्येक अग्निवीर के लिए सैन्य सेवा से मुक्त होने से पहले **व्यक्तिगत संक्रमण योजना** तैयार की जाएगी? क्या सेवा समाप्ति से **24, 18, 12 और 6 महीने पहले** कैरियर परामर्श, कौशल आकलन और आगे की दिशा तय करने की व्यवस्था होगी?
3. केवल छह पद पर्याप्त कैसे होंगे?
पूरे राज्य में इस व्यवस्था को लागू करने के लिए प्रस्तावित छह पदों में **कैरियर परामर्शदाता, रोजगार एवं नियोक्ता समन्वय अधिकारी, कौशल मानचित्रण विशेषज्ञ, उद्यमिता विशेषज्ञ तथा सूचना प्रौद्योगिकी एवं आँकड़ा विशेषज्ञ** कहाँ हैं?
इतने व्यापक दायित्व के लिए यह मानव संसाधन कैसे पर्याप्त होगा?
4. अधिकार और जवाबदेही किसकी होगी?
**मुख्यमंत्री कार्यालय, सैनिक कल्याण विभाग, रोजगार विभाग, कौशल विकास विभाग, उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम, सेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों तथा जिला प्रशासन** के बीच कार्य-विभाजन क्या होगा?
एक **एकल नोडल प्राधिकरण** तथा स्पष्ट **जवाबदेही व्यवस्था** कब जारी की जाएगी?
5. सैन्य कौशल को नागरिक क्षेत्र में मान्यता कैसे मिलेगी?
चार वर्ष की सैन्य सेवा के दौरान अग्निवीरों द्वारा अर्जित कौशल को **मान्यता प्राप्त नागरिक योग्यताओं और रोजगार योग्य व्यवसायों** में कौन परिवर्तित करेगा?
**पूर्व अर्जित ज्ञान एवं कौशल की मान्यता, प्रमाणन तथा समकक्षता** की व्यवस्था सैन्य सेवा से मुक्त होने से पहले कैसे सुनिश्चित की जाएगी?
6. वास्तविक रोजगार कहाँ हैं?
इस समय कितने **सत्यापित नियोक्ता** और कितनी वास्तविक रिक्तियाँ उपलब्ध हैं?
कितने **सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों** ने अग्निवीरों को रोजगार देने के लिए औपचारिक प्रतिबद्धता दी है?
क्या केवल नियुक्ति-पत्र जारी होने तक निगरानी होगी या **वास्तविक कार्यग्रहण और रोजगार में बने रहने** की भी निगरानी की जाएगी?
7. डिजिटल पोर्टल कितना सक्षम होगा?
क्या प्रस्तावित डिजिटल पोर्टल केवल सूचना उपलब्ध कराने वाला पोर्टल होगा या इसमें प्रत्येक अग्निवीर की **व्यक्तिगत प्रोफ़ाइल, कौशल मानचित्रण, रोजगार मिलान, आवेदन की स्थिति, शिकायत निवारण तथा नियुक्ति/रोजगार की स्थिति** दर्ज करने वाली सम्पूर्ण संक्रमण प्रबंधन व्यवस्था होगी?
8. जिला स्तर पर व्यवस्था कैसे पहुँचेगी?
उत्तराखंड के सभी **13 जिलों में नोडल अधिकारी** कौन होंगे?
क्या मौजूदा **सैनिक कल्याण व्यवस्था** को इस प्रकोष्ठ से जोड़ा जाएगा?
क्या रोज़गार प्रकोष्ठ स्वयं अग्निवीरों तक पहुँचेगा, या अग्निवीरों को प्रत्येक जानकारी और सहायता के लिए देहरादून स्थित प्रकोष्ठ तक आना पड़ेगा?
9. आरक्षण, शिक्षा और स्वरोजगार का वास्तविक मार्ग क्या है?
अग्निवीरों के लिए घोषित **10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण** किन पदों पर लागू होगा और उसका वास्तविक दायरा क्या है?
उच्च शिक्षा, **केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों एवं पुलिस सेवाओं** में अवसर तथा स्वरोजगार के लिए **वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और भर्ती की समय-सीमा** क्या होगी?
10. सफलता कैसे मापी जाएगी?
सरकार कितने अग्निवीरों के **पंजीकरण, कैरियर आकलन, कौशल प्रमाणन, प्रशिक्षण, रोजगार प्रस्ताव और वास्तविक नियुक्ति** का आँकड़ा सार्वजनिक करेगी?
रोजगार मिलने के **3, 6 और 12 महीने बाद** कितने अग्निवीर रोजगार में बने हुए हैं, इसका भी आँकड़ा जारी किया जाएगा?
यदि कोई अग्निवीर इस पूरी व्यवस्था से बाहर रह जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी और जवाबदेही किसकी होगी?
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**उत्तराखंड क्रांति दल का स्पष्ट मत है:**
> **“रोज़गार प्रकोष्ठ बनाना पहला कदम है; संक्रमण को सफल बनाना असली परीक्षा है।”**
सरकार को घोषणा से आगे बढ़कर ऐसी सम्पूर्ण व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें **नीति, जिम्मेदारी, समय-सीमा, मापनीय परिणाम और जवाबदेही** स्पष्ट हों।
केवल पोर्टल, रिक्तियों की सूची या प्रशिक्षण को रोजगार की उपलब्धि नहीं माना जा सकता। प्रत्येक अग्निवीर को सैन्य सेवा से मुक्त होने से पहले उसके अगले कदम—**रोजगार, शिक्षा या उद्यमिता**—का स्पष्ट और निगरानी योग्य मार्ग मिलना चाहिए तथा रोजगार प्राप्त करने के बाद भी आवश्यक **मार्गदर्शन और सहयोग** जारी रहना चाहिए।
