टनकपुर में बनेगा जिलाधिकारी कैम्प कार्यालय और आवास, शासन ने ₹4.78 करोड़ की परियोजना को दी मंजूरी
पहली किश्त के रूप में ₹1.91 करोड़ जारी, सीमांत क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्था होगी मजबूत; आपदा प्रबंधन और जनसेवाओं को मिलेगी गति
चम्पावत, 11 जुलाई। उत्तराखंड शासन ने जनपद चम्पावत की तहसील पूर्णागिरी (टनकपुर) में जिलाधिकारी कैम्प कार्यालय एवं आवास के निर्माण को मंजूरी दे दी है। शासन ने इस परियोजना के लिए 4.78 करोड़ रुपये (₹478.31 लाख) की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए निर्माण कार्य शुरू करने के लिए प्रथम किश्त के रूप में 1.91 करोड़ रुपये (₹191.32 लाख) भी जारी कर दिए हैं। इस परियोजना से सीमांत क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को नई मजबूती मिलेगी और आमजन को अधिक त्वरित एवं प्रभावी प्रशासनिक सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
शासन के आदेश के अनुसार परियोजना की कुल लागत ₹478.31 लाख निर्धारित की गई है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद टनकपुर और पूर्णागिरी क्षेत्र में जिलाधिकारी स्तर की प्रशासनिक उपस्थिति सुनिश्चित होगी, जिससे जनसमस्याओं के समाधान, विकास कार्यों की निगरानी और प्रशासनिक निर्णयों के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
इस परियोजना से विशेष रूप से सीमांत क्षेत्र में रहने वाले लोगों को राहत मिलेगी। जिलाधिकारी कैम्प कार्यालय स्थापित होने से आपदा प्रबंधन, कानून-व्यवस्था, जनशिकायतों के त्वरित निस्तारण और विभिन्न सरकारी योजनाओं की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। साथ ही अधिकारियों की नियमित मौजूदगी से प्रशासन और जनता के बीच समन्वय भी मजबूत होगा।
शासन ने निर्माण कार्य के लिए कई महत्वपूर्ण शर्तें भी निर्धारित की हैं। जारी धनराशि का उपयोग केवल स्वीकृत मद में किया जाएगा तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 के भीतर कार्यों की निर्धारित भौतिक प्रगति सुनिश्चित करनी होगी। निर्माण एजेंसी को 31 मार्च 2027 से पहले उपयोगिता प्रमाण-पत्र और प्रगति रिपोर्ट शासन को उपलब्ध करानी होगी।
इसके अलावा निर्माण कार्य शुरू करने से पहले स्थल चयन समिति की रिपोर्ट प्राप्त करना अनिवार्य होगा। परियोजना का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों और गुणवत्ता के अनुरूप किया जाएगा तथा निर्माण सामग्री का उपयोग प्रयोगशाला परीक्षण के बाद ही किया जाएगा, ताकि कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
राज्य सरकार का मानना है कि इस स्वीकृति से चम्पावत जनपद की प्रशासनिक आधारभूत संरचना को नई मजबूती मिलेगी। सीमांत क्षेत्रों में प्रशासन की पहुंच बढ़ने के साथ-साथ जनसेवाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, विकास कार्यों की निगरानी और आपात परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने में यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
