मोहान की आईएमपीसीएल दवा फैक्टरी निजी कंपनी को बेची गई, कर्मचारियों में भविष्य को लेकर चिंता
अल्मोड़ा। मोहान स्थित इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी आईएमपीसीएल दवा फैक्टरी अब निजी हाथों में चली गई है। जानकारी के अनुसार फैक्टरी को स्काईमैप फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को 121 करोड़ रुपये से अधिक की राशि में बेचा गया है। रणनीतिक बिक्री को मंजूरी मिलने के बाद क्षेत्र में कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच चिंता का माहौल है।
आईएमपीसीएल देश की प्रमुख सरकारी दवा फैक्टरियों में शामिल रही है, जहां आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं का निर्माण किया जाता रहा है। लंबे समय से चल रही विनिवेश प्रक्रिया के बाद अब यह फैक्टरी पूरी तरह निजी कंपनी के अधीन हो गई है। बताया जा रहा है कि स्काईमैप फार्मास्युटिकल्स ने सबसे ऊंची बोली लगाकर फैक्टरी का अधिग्रहण किया।
फैक्टरी के निजीकरण के बाद सबसे अधिक चिंता वहां कार्यरत कर्मचारियों को लेकर जताई जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि निजी कंपनी आने वाले समय में अपनी जरूरत के हिसाब से अस्थायी कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है। ऐसे में सैकड़ों परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आईएमपीसीएल केवल एक दवा फैक्टरी नहीं, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों और रोजगार का बड़ा आधार रही है। फैक्टरी से जुड़े कई परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं। ऐसे में निजीकरण के बाद रोजगार सुरक्षा, वेतन व्यवस्था और स्थानीय हितों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि फैक्टरी के संचालन में स्थानीय रोजगार, कर्मचारियों के अधिकार और क्षेत्रीय हितों को प्राथमिकता दी जाए। लोगों का कहना है कि निजीकरण के बाद भी कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित रहे और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलते रहें।
आईएमपीसीएल के निजी हाथों में जाने के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई कंपनी कर्मचारियों, उत्पादन व्यवस्था और स्थानीय लोगों के हितों को लेकर क्या नीति अपनाती है।
