उत्तराखंड ने रचा इतिहास, पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंची हिमालयन रेनबो ट्राउट मछली
नेपाल को 5 मीट्रिक टन ट्राउट का पहला निर्यात, 33 मत्स्य पालकों को ₹23.50 लाख की आय; यूरोप, मध्य-पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों पर सरकार की नजर
अमीषा भट्ट
देहरादून 27जून :उत्तराखंड ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार राज्य में उत्पादित 5 मीट्रिक टन हिमालयन रेनबो ट्राउट मछली का सफलतापूर्वक अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात किया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तराखंड की ट्राउट मछली को वैश्विक पहचान मिलने का रास्ता खुल गया है, वहीं पर्वतीय क्षेत्रों के मत्स्य पालकों के लिए आय के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।
देहरादून स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में पशुपालन एवं मत्स्य विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि पिथौरागढ़ जिले के धारचूला और मुनस्यारी क्षेत्र की तीन मत्स्यजीवी सहकारी समितियों द्वारा उत्पादित ट्राउट मछली को कोल्ड-चेन व्यवस्था के माध्यम से गुजरात के वेरावल भेजा गया। यहां आधुनिक तकनीक से प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के बाद 23 जून 2026 को नेपाल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका सफल निर्यात किया गया। इस पहली निर्यात खेप से जुड़े 33 मत्स्य पालकों को लगभग 23.50 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई।
मंत्री ने बताया कि इस ऐतिहासिक पहल को सफल बनाने के लिए मत्स्य विभाग ने हार्वेस्टिंग, पैकेजिंग और परिवहन पर 5.40 लाख रुपये की गैप फंडिंग सहायता उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा उत्तराखंड की ट्राउट मछली को अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के रूप में स्थापित करने की है।
सौरभ बहुगुणा ने बताया कि दुबई में आयोजित गुलफूड एक्सपो (Gulfood Expo) के दौरान विभाग ने कई अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और निर्यातकों से संपर्क स्थापित किए थे। उसी का सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहा है। विभाग अब यूरोप, मध्य-पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में भी ट्राउट मछली के निर्यात की संभावनाओं पर तेजी से काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मत्स्य पालकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में वर्ष 2024 में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के साथ हुए एमओयू के तहत अब तक 2.10 करोड़ रुपये मूल्य की 45.10 मीट्रिक टन ट्राउट मछली की आपूर्ति की जा चुकी है, जिससे स्थानीय उत्पादकों को स्थायी बाजार मिला है।
मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में मत्स्य पालन तेजी से रोजगार और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बन रहा है। वर्ष 2022 तक राज्य में जहां 10,011 मत्स्य पालक थे, वहीं अब उनकी संख्या बढ़कर 15,657 हो गई है। इनमें 3,584 महिला मत्स्य पालक भी शामिल हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक संकेत है। वहीं मत्स्य उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर वर्ष 2012-17 के 2 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-26 में 11 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 में उत्तराखंड में कुल 11,805 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन हुआ, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत 165 करोड़ रुपये रही। वहीं मत्स्य विभाग का वार्षिक बजट वर्ष 2021-22 के 55.76 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2026-27 में 261.41 करोड़ रुपये हो गया है। पिछले चार वर्षों में 5,646 मत्स्य पालकों के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित किए गए हैं, जबकि विभाग में 33 नियमित नियुक्तियां भी की गई हैं।
सौरभ बहुगुणा ने कहा कि राज्य सरकार की ट्राउट प्रोत्साहन योजना और मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की ट्राउट मछली वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान बनाएगी और मत्स्य पालन राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन तथा किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
