उत्तराखंड से पहली बार नेपाल भेजी गई हिमालयन ट्राउट मछली, मत्स्य क्षेत्र को मिली नई पहचान
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के मत्स्य क्षेत्र ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार नेपाल को हिमालयन ट्राउट मछली का निर्यात किया है। शुक्रवार को लगभग 5 टन ट्राउट मछली की पहली खेप नेपाल के लिए रवाना की गई। इस अवसर पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा ने वर्चुअल माध्यम से कंसाइनमेंट को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
यह पहली बार है जब राज्य में उत्पादित ट्राउट मछली अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंची है। सीमावर्ती क्षेत्र पिथौरागढ़ से भेजी गई यह खेप उत्तराखंड के मत्स्य उत्पादों की गुणवत्ता और बढ़ती मांग को दर्शाती है।

सौरभ बहुगुणा ने कहा कि राज्य सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन को रोजगार और आय के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं और विभागीय प्रयासों के चलते अब स्थानीय मत्स्य उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि इससे पहले मत्स्य विभाग द्वारा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) को भी सफलतापूर्वक ट्राउट मछली की आपूर्ति की गई थी। उस अभियान में उत्तरकाशी जिले ने प्रमुख भूमिका निभाते हुए बड़ी मात्रा में मछली उपलब्ध कराई थी।
नेपाल को निर्यात की शुरुआत के साथ ही प्रदेश के मत्स्य पालकों को नए बाजार मिलने की संभावना बढ़ी है। इससे स्थानीय उत्पादकों की आमदनी में वृद्धि होने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
मत्स्य विभाग ने निर्यात प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए कोल्ड-चेन नेटवर्क, आधुनिक पैकेजिंग और परिवहन व्यवस्थाओं को मजबूत किया है। विभाग का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बाजार तक पहुंचाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल को की गई यह पहली आपूर्ति भविष्य में अन्य देशों के लिए भी रास्ते खोल सकती है। इससे उत्तराखंड को मत्स्य उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
